Negative Attitude

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Saturday, May 16, 2020

हमे आरोग्य सेतु ऍप नहीं,भोजन सेतु ऍप चाहिए

कोरोना के नाम पर अचानक लॉकडाउन और इस अचानक लॉकडाउन में हमारे देश के प्रवासी श्रमिक,मजदूर या कामगार के साथ जो दुर्दशा हो रही है उसे शोषण और क्रूरता के लिए मानव इतिहास के किसी भी कालखंड से सर्वाधिक स्वर्णिम माना जाएगा। "जान है तो जहान है" के नाम पर श्रमिक,मजदूर या कामगार को इस हालत में छोड़ दिया गया जिसमे उनके पास भोजन के अभाव के साथ साथ ख़ुद को सुरक्षित रखने के लिए महाराष्ट्र,दिल्ली,तमिलनाडु या कर्नाटक से उत्तर प्रदेश या बिहार तक पैदल यात्रा करने की अनिवार्यता थोप दिया गया..इनके लिए इनका देश अचानक से परदेश हो गया..टीवी पर इनकी दशा देख शरीर सिहर जाता है,तंत्रिका तंत्र मानो स्थिर हो जाती है परन्तु इन पर करुणा दिखाने के वजाये समस्त लोकतंत्र इंसानो की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए त्रिकटु चूर्ण बाँट रही है.

हमारी लोकतंत्र की इम्युनिटी इतनी ख़राब है ये किसी को कहाँ पता था.लॉकडाउन जैसी विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की सरकारी योजना या मानदंडों में प्रवासी श्रमिक,मजदूर या कामगार थे ही नहीं? कोरोना ने अब तक जितने(2752) लोगो की जान ली है उससे कही ज्यादा हमारे लोकतंत्र की ख़राब इम्युनिटी के वजह से प्रवासी श्रमिकों की जान गयी है.

The Hindu अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ विभिन्न राज्यों में फंसे लगभग ११ हजार प्रवासी श्रमिकों के सर्वेक्षण में पाया गया कि 8 अप्रैल से 13 अप्रैल के बीच, 96% प्रवासी श्रमिकों को सरकार से राशन नहीं मिला। सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 90% को उनके नियोक्ताओं द्वारा मजदूरी भुगतान नहीं मिला। 27 मार्च से 13 अप्रैल तक, सर्वेक्षण में शामिल 70% श्रमिकों के पास जीविका के लिए २०० रुपये से भी कम बचा था. यह सर्वेक्षण Stranded Workers Action Network (SWAN) द्वारा किया गया था .. सुचना के नाम पर झुठ परोसने वालों को The Hindu अखबार की इस रिपोर्ट में देशद्रोह दिखाई देगा,असली देशभक्ति तो सिर्फ जमात जमात की रट लगाना है.

सही तरीक़े से आँकलन करें तो पायेंगे की कोरोना भारत में ख़ुद से नहीं आया,लाया गया है,संक्रमण को सत्कार से पोषित किया गया और फिर इसके लिए आनन् फ़ानन में लॉकडाउन का चक्र तैयार किया गया और यह बताया गया की कैसे गणित/सांख्यिकी और नारों/theme से कोरोना को मात दी जायेगी। याद कीजिये कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क कितना ज़रूरी ये दूसरे चरण के लॉकडाउन के उद्घोषणा में बताया गया था!

WHO ने वैश्विक स्तर पर मौत के आंकड़ों का विपणन करके कोरोना महामारी को इतना भयावह बताया मानो समस्त मानव जाती विलुप्त होने वाली है.ध्यान रहे सामान्य तौर पर भारत में हर दिन लगभग 27000 लोगो की मृत्यु होती है! WHO ने दुनिया को वैश्विक स्तर पर मौत के आंकड़ों में कभी भी जनसांख्यिकीय विविधता,समुचित इलाज़ की प्राथमिकता में भेदभाव को बताया ही नहीं। एक ऐसी वैश्विक संस्था जिसकी स्वास्थ्य के मामले में अभिभावक होने की ज़िम्मेदारी है,वह हर दिन एक नयी बात करके गुमराह या यूँ कहे की भयभीत कर रहा है.सोचिये वैश्विक स्तर पर नेतृत्व एवं WHO की इम्युनिटी कितनी ख़राब है?

हमारे देश में ग़रीबी और खाद्य सुरक्षा सर्वदा से स्थानिक रोग रहा है और ऐसे में प्रवासी श्रमिकों,मजदूरों या कामगारों को लॉकडाउन में क्रूरता के साथ अनाथ छोड़ देना हमारे गणराज्य के तीनो स्तम्भों विधायिका,न्यायपालिका,कार्यपालिका की ख़राब इम्युनिटी को दर्शाता है.देश जब इनके लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता वो महामारी से क्या लड़ेगा ? हम कोरोना से जितने से पहले कई बार मरेंगे वह भी तड़प तड़प कर!

हमारे देश में खाद्य सुरक्षा के प्रति करुणा और संवेदनशीलता के उदहारण है.Amma Unavagam(Tamil) को ही ले लीजिये। यह तमिलनाडु सरकार द्वारा संचालित एक खाद्य सब्सिडी कार्यक्रम है। Amma Unavagam का शाब्दिक अर्थ है माँ की कैंटीन (अम्मा कैंटीन)। यह भारत में किसी भी सरकार द्वारा चलाई गई पहली योजना है। बिना किसी योजना के अचानक से थोपे गए लॉकडाउन के दौरान तमिलनाडु में अम्मा कैंटीन गरीबों के लिए वरदान सिद्ध हुआ है.सत्तारूढ़ एआईएडीएमके राज्य में मौजूद कैंटीन के भोजन का पूरा खर्च वहन करके अम्मा कैंटीन को ग्राहकों के लिए मुफ्त कर चुकी है. राज्यभर में लगभग 650 अम्मा कैंटीन में से अकेले चेन्नई में ही 407 हैं. यहां सुबह के नाश्ते में इडली, दोपहर के लिए विभिन्न प्रकार के चावल जबकि रात के खाने के लिए रोटी आदि भी उपलब्ध कराई जाती है.

भारत एक श्रमिक अधिशेष देश है और इसके लिए सबसे पहले लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में गरीबों एवं श्रमिकों के प्रति करुणा के लिये मजबूत इम्युनिटी की आवश्यकता है जिससे की हमारी व्यवस्था विपरीत परिस्थितियों में लोगो को कम से कम भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों को सुनिश्चित कर सके.

हमे शहर-शहर,गाँव-गाँव अम्मा कैंटीन जैसी खाद्य सुरक्षा चाहिए ताकि ग़रीब, प्रवासी श्रमिक लॉकडाउन जैसी विपरीत परिस्थितियों का डट कर मुक़ाबला कर सके....हमे आरोग्य सेतु ऍप नहीं,भोजन सेतु ऍप चाहिए...

#CoVid19 #StrandedMigrantWorkers #CoronaVirus #Tamilnadu #AmmaCanteen

Thursday, May 14, 2020

चुनौती तो अब आत्मनिर्भर होने की है..."अच्छे दिन" का क्या ये तो महज एक नारा था...


हम "पी.सी.सरकार" का इसलिये समर्थन नही करते कि इन्होंने हमारे बारातियो का स्वागत "पान पराग" से नही किया था.. हम इसलिए समर्थन करते है कि ये भारत को काल्पनिक योजनाओं और घोषणाओं के नाम पर अनगिनत बार बंटवारा कर चुके है...इन बंटवारों से "पी.सी.सरकार" को मीडिया हेडलाइंस में शोहरत तो मिलती है लेकिन देश को सिर्फ हताशा या यूं कहें कि ख़्याली खिचड़ी ही मिलता है...अब तक राजनैतिक रैलियों या चुनावी जनसभाओं में इन्होंने जितने भी वादे किए है उसका स्टेटस पता कीजिये,कमल कम, कीचड़ ही ज्यादा मिलेगा...

अब आप आत्मनिर्भर अभियान पैकेज को ही देख लीजिये, कर्ज के जरिये कोई भी वित्तीय व्यवस्था आत्मनिर्भर हो सकती है क्या? इससे दुकाने तो ज्यादा खुल जायेंगी लेकिन खरीददारों की संख्या कैसे बढ़ेगी इसका "पी.सी.सरकार" के किसी मंत्री को नही पता....सिर्फ कर्ज से अर्थव्यवस्था का पोषण का मतलब आर्थिक मंदी का endemic के रूप में हमारे बीच स्थायित्व हो जाना...

भारत जैसे विशाल देश में कोरोना जैसी संक्रामक महामारी के प्रबंधन में "पी.सी.सरकार" द्वारा हर दिन theme/ विषय परिवर्तित करना बौद्धिक निर्बलता को दर्शाता है..कभी जान से जहान तो कभी जान भी जहान भी इत्यादि इत्यादि ...कोरोना महामारी में आज उपभोक्ताओं का अस्तित्व डाँवाडोल है और असल मे जरूरत है उपभोक्ताओं को आर्थिक तौर पर ससक्त बनाने की वह भी कल्याण से कर्ज से नही...

भारतीय अर्थतंत्र मुख्यतः घरेलु उपभोग पर निर्भर है और ऐसे में उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने की प्राथमिकता होनी चाहिए...वित्तीय संस्थानों का व्यवसाय ही है सूदखोरी का,पैकेज में डालो या न डालो...जो पैकेज घोषित किया है उसमें सबकुछ बैंको पर थोपा गया है...सरकार इसमे सिर्फ समाचार उद्घोषक की तरह है.."पी.सी.सरकार" ने भारतवासियों से जब मदद   (#PMCARES) की गुहार लगाई तो भारतवासियों ने उनके खाते में डायरेक्ट दान दिया...हमने तो दान का कोई अपरोक्ष जरिया नही बताया...

"पी.सी.सरकार" को आत्मनिर्भर बनाने की इतनी चिंता है तो DBT(Direct Benefit Transfer) के जरिये उपभोक्ताओं के माँग की अग्नि प्रज्ज्वलित करने की सोचते... ताकि MSME"s या LSI's जो उत्पादन करे उसके विक्रय के साथ साथ उचित मुनाफा भी सुनिश्चित हो...

आत्मनिर्भर की इतनी चिंता होती तो रेल परिसर में Google के वजाए MTNL या BSNL का फ्री वाईफ़ाई होता...आत्मनिर्भर की इतनी चिंता होती "पी.सी.सरकार"  के convoy के लिए महिंद्रा की गाड़ियां होती...आत्मनिर्भर की इतनी चिंता होती तो  "पी.सी.सरकार" Montblanc पेन की जगह Linc पेन का  इस्तेमाल करते....सिर्फ theme से कोई भी व्यवस्था भीम जैसा बलशाली नही हो सकता,इसके लिए उचित पोषण भी जरूरी है...theme/नारा "अच्छे दिन" का भी था पर देखिये यह कहाँ आकर अटक गया...चुनौती तो अब आत्मनिर्भर होने की है..."अच्छे दिन" का क्या ये तो महज एक नारा था...भुल जाइये इसे...please


**पी.सी : प्रधान चौकीदार


#आत्मनिर्भरभारतअभियान #Atmanirbharbharat

Sunday, May 10, 2020

मनरेगा- भारतीय विधायिका की विफलता नही दूरदर्शिता है


मेरी राजनैतिक सुझबुझ ये कहती है की #मनरेगा कभी बंद मत करो...मैं ऐसी गलती नही कर सकता हूँ....क्योंकि... क्योंकि...मनरेगा आपकी(#काँग्रेस) विफलताओं का जीता जागता स्मारक है...आज़ादी के 60 साल के बाद आपको(#काँग्रेस) लोगो को गड्ढ़े खोदने के लिए भेजना पड़ा...ये आपकी विफलताओं का स्मारक है..और मैं गाजे बाजे के साथ इस स्मारक का ढोल पिटता रहूंगा...

प्रधान सेवक श्री नरेन्द्र मोदीजी

https://m.youtube.com/watch?v=5nBRKUf6AAo&feature=youtu.be


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अच्छी राजनैतिक सूझबूझ और दूरदर्शिता दो अलग प्रकार के दर्शन है ज़नाब...अच्छी राजनैतिक सूझबूझ विकासशील देश की सियासी संस्थाओं के लिए जरूरी होंगी, विकासशील देश के लिए तो कल्याणकारी दूरदर्शिता ही काम आएगी...

आज यही "मनरेगा रूपी विफलताओं का स्मारक" कोरोना महामारी में ग्रामीण भारत को जीवित रखने के लिए संजीवनी का कार्य कर रही है...

आज #मनरेगा अकेले आधे भारत का कोरोना वॉरियर है...ढोल नगाड़ा तो बनता है...



#manrega #DrManmohanSingh 

Friday, March 23, 2018

फेसबुक डेटा लीक एक तार्किक मुद्दा या भ्रमित करने का एक नया हथियार

भारतीय गणराज्य में कैम्ब्रि‍ज एनालिटिका और फेसबुक डेटा लीक का मामला इतनी गर्मजोशी से "मेक इन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड" में छाया हुआ है मानिये पाकिस्तान ने चीन पर हमला कर दिया हो.भाई साहब फ्री की हर चीज अदृश्य होकर महँगी होती है.इंटरनेट के युग में तो यह इससे सम्बंधित सभी व्यवसाय की अदृश्य पूंजी है. जो लोग भी डेटा लीक मुद्दे को उछाल रहे है वो यह सन्देश देना चाहते है की डेटा लीक जैसी घटना आश्चर्य है.असल में इस डेटा लीक वाले हमाम में सभी नंगे होकर खुश है, नाराजगी तो बस इस बात की है की हमाम में नंगे वाले इनके फोटो सार्वजनिक हो गयी है.

आप कोई भी "एप्लीकेशन/ऍप" (चाहे वो सरकारी हो,प्राइवेट हो या किसी मीडिया/न्यूज़ पपेर या टीवी चैनल का हो) किसी भी ऍप स्टोर से डाउनलोड करे वो आपका लगभग प्रत्येक निजी एवं संवेदनशील डेटा का एक्सेस लेकर ही ऍप इस्तेमाल करने देता है! मतलब पैंट तो फ्री में दिया लेकिन फटी हुई जेब के साथ!

अब बताइये "डेटा लीक" कोई मुद्दा है क्या? डेटा लीक तो इंटरनेट व्यवसाय की रीढ़ है अगर ये नहीं तो इंटरनेट किसी बंद अलमारी के जैसा होगा! गूगल को पंडित की उपाधि फ्री सेवा के लिए नहीं वल्कि फ्री जानकारी मुहैया करने के लिए दी गयी है और ये फ्री जानकारी "डेटा लीक/एक्सेस" के जरिये ही संभव हो पा रही है!

समाचार वाले ऍप को समाचार उपलब्ध कराने से मतलब है फिर उनको मेरे फ्रेंड लिस्ट या मीडिया गैलरी का एक्सेस क्यों चाहिए। नरेंद्र मोदी ऍप (narendramodi.in) को जनता से संवाद स्थापित करना है फिर उनके ऍप को हमारे मीडिया गैलरी,फोटो एवं सारे फाइल्स की एक्सेस क्यों चाहिए?

मतलब स्पष्ट है "डेटा लीक" कोई मुद्दा नहीं है. इंटरनेट के युग में इंटरनेट से हमें हमारा निजी डेटा लेने के बाद ही फ्री सेवाएं मिलती है! राजनीतिज्ञों को पहले अपने open-ended चरित्र को structured करने की जरुरत है तभी ये कुछ जनकल्याण की सोच पाएंगे।

हमारे जनप्रतिनिधि हमेशा "२६% भारतीय अशिक्षित है" का लाभ open-ended अनाप- शनाप बोलकर उठाने के चक्कर में लगे रहते है!!!


Friday, October 7, 2016

स्ट्राइक बचाकर रखिये ''सरजी-कल'' के लिए..

राजनीति में राजनीति द्वारा शाशकीय शीर्ष पर पहुचने या पहुँचकर कायम रहने की राजनीति ही मजबुत लोकतंत्र की बीमार राजनीति है... सर्जीकल स्ट्राइक के मसले पर या सर्जीकल स्ट्राइक से मिले पॉलिटिकल पब्लिसिटी से आगामी यूपी चुनाव में होने वाले संभावित फायदे पर हमले से ज्यादा जरुरी है की हमारे नेतागण आतंरिक असहमति से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही भारत की किरकिरी को इस मुद्दे पर सियासी एकजुटता दिखा अब तक हो चुके राजनैतिक नुक्सान को नियंत्रित करे। RTI का आवेदन मीडिया में क्यों दे रहे है? 

देशहित सर्वोपरि है,चुनाव तो अपने यहाँ हर वर्ष कही न कही होता ही है,स्ट्राइक बचाकर रखिये,पराजयः के आतंक के लिए सर्जीकल टाइप का सिचुएशन इधर भी मिलेगा!

बयानबाज़ी ऐसे हो रही है मानो देश की सामरिक शक्ति का राजनैतिक इक्षाशक्ति के आगे कोई स्थान नहीं ही है.सत्तारूढ़ पार्टी अपनी पीठ खुद थपथपा रही है, वही विपक्षी पार्टिया पंजाब और यूपी चुनावों को केंद्रित कर इस मुद्दे पर अपनी अलग टाइप के बयानबाजी से सफलता के सूत्र तलाशने में जुटे है. ऐसी बयानबाजी का क्या लाभ की बयान आप अपनी सरजमीं में दे रहे है और हिट हो रहे है पाकिस्तानी मीडिया में.

सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की घोषणा बाकायदा मीडिया के साथ किया था, इसके अतिरिक्त आपको और क्या साक्ष्य चाहिए?

विश्वसनीयता में भारतीय सेना का भारतीय राजनीति से कोई तुलना ही नहीं है.ये कोई काला धन,महँगाई या अच्छे दिन जैसा चुनावी रैली का जुमला रूपी हवाई फायरिंग नहीं था,ये भारतीय सेना का सर्जिकल स्ट्राइक था,आतंकवाद के खिलाफ भारत की सामरिक शक्ति की एक सुक्ष्म झाँकी। इससे हमारे शत्रु को विचलित होना चाहिए था पर इसके इतर यहां तो हमारे राजनेता अलग अलग देश की मीडिया में अपने बयानों से हिट होने की दौड़ लगा रहे है!

समाजवाद,बहुजन समाज और आम आदमी पर अलग अलग सियासी संस्थाओं की राजनैतिक विचारधारा अलग अलग हो सकती है और इसका भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था या हमारा संविधान समर्थन भी करता है लेकिन जब बात देश की संप्रभुता या आतंकवाद,''जो पाकिस्तान कश्मीर में जिहाद का रूप दे एक प्रतिपत्री युद्ध लंबे समय से करता आ रहा है'',सरीखे मुद्दे पर हो तो आप सभी सियासी हुक्मरानों को एक साथ,एक लय में खड़ा होना चाहिए।

एक मैंगो मैन या साधारण व्यक्ति अपनी राय वह भी ब्लॉग के जरिये इससे ज्यादा नहीं रख सकता!

जय हिन्द!

Wednesday, July 6, 2016

ईद मुबारक..:)

ईद मुबारक..:) आप सभी को ईद की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें |

Wednesday, March 23, 2016

होली की हार्दिक शुभकामनायें

आपको और आपके परिवार को रंगों के उत्सव होली की हार्दिक शुभकामनायें !!